एक खूबसूरत औरत- जिसे अब याद नही किया जाता..
…जिसे इस रंगीन दुनिया ने बे-आबरू किया ..?
एक रोज उत्तर भारत के चाकू वाले मशहूर शहर के बस-स्टैंड पर खड़ा था, रात के दो बज चुके थे, तभी एक पान की दुकान पर एक गीत बज़ता हुई सुनाई दिया..झूम के गा यूं आज मेरे दिल रात जो गुजरे सुबह न आये…जैसे कोई बचपन की कहानी…गीत कर्ण-प्रिय लगा तो पान वाले से वही सी डी देने को कहा बड़ी मुश्किल में वह राज़ी हुआ…बात गुजर गयी..काफ़ी दिनों तक वह कार के म्युजिक सिस्टम में नाचती रही…गीत तो मानो सफ़र तय करने का जरिया थे, अपनी जिन्दगी के गीतों से ही फ़ुरसत कहा थी..गीत भी सब तरह के दुख-सुख, उत्साह-उल्हास लिए हुए..बस इसलिए गीत सुनना एक शगल सा रह गया है, पर अभी एक दिन लखनऊ से वाअपस आते वक्त एक गीत का मुखड़ा बज़ा सी डी और आगे नाची तो अन्तरा आ गया…ढीला ढीला कुर्ता है पजामा तंग तंग है, ….फ़िर दसरा अन्तरा आया… गेसुओं में रात खोई दिल भी मेरा खो गया…कोई तेरा हो न हो दिल मेरा तेरा हो गया…रफ़ी की प्रत्येक अक्षर में स्पष्टता व गूंजती हुई आवाज…ऐसा अम्मा ने बोला जो सफ़र में मेरे साथ थी…अक्सर वो पूंछती है कौन है इस गीत में…मैं नही बता पाया…वो बोली शम्मी कपूर और सायरा बानों…पर इस बार उनका फ़िल्मी ज्ञान उन्हे धोखा दे गया….गीत को कई बार सुना …घर पहुंच कर इस गीत का वीडियो देखा तो नायक-नायिका के तौर पर शशी कपूर व विमी थे…विमी का नाम देखते ही…मन में उत्कंठा जागी की इस हसीन अदाकारा के बारे में तो मैने कही पढ़ा सुना नही…कौन है ये ?…बस और उसी उत्कंठा ने विमी को मुझसे परिचित कराया…रामपुर की उस अंधेरी रात से शुरू हुआ सिलसिला अब यहां तक आ पहुंचा…आप भी जानिए विमी को…जो असफ़लता और पारिवारिक जीवन की राहो में विफ़ल हो गयी और एक दिन….
एक बहुत ही खूबसूरत और आजाद खयाल महिला जो एक पंजाबी परिवार से थी, अपने परिवार के मर्जी के खिलाफ़ इन्होने कलकत्ता के एक मारवाड़ी व्यवसायी से शादी की, म्युजीसियन रवी ने विमी को मुंबई लाकर बी आर चोपड़ा से मिलाया, और यही से शुरू हुआ इस महिला का फ़िल्मी सफ़र..फ़िल्म हमराज़ से..इन्होने वचन, पतंगा और आबरू जैसी बेहतरीन फ़िल्मों में काम किया..लेकिन इन्हे इच्छित ख्याति नही मिली..सुन्दरता के गुमान और महात्वाकांक्षाओं ने विमी को फ़िल्मों ऐसे शॉट देने के लिए प्रेरित किया जो उस वक्त सामाजिक दायरे से बाहर थे..किन्तु फ़िर चाहत पूरी न हुई, इनके पति ने भी इस बात का विरोध किया, अंतत: इनके पति मुम्बई छोड़ कलकत्ता वापस आ गये, अत्यधिक खर्चीली जीवनशैली ने विमी को गरीब बना दिया.. विमी ने जॉली नाम के प्रोड्युसर के साथ रहने लगी, उसने भी विमी की खूबसूरती के आकर्षण में विमी का साथ किया..लेकिन विमी फ़िल्मी दुनियां में लम्बी दौड़ नही दौड़ पाईं, आखिरकार तनाव और तंगहाली ने विमी को शराब का लती बना दिया, और जॉली ने भी उनका साथ छोड़ दिया, कहते हैं विमी शराब की चाहत में वैश्यावृत्ति भी करने लगी थी, अब न तो वह अपने घर पंजाब वापस जा सकती थी क्योंकि उसने घर वालो से बगावत करके कलकत्ता के व्यवसायी से शादी की और न ही अपने पति के पास..क्योंकि उसने अपने पति का मान भी नही रखा इस चकचौंध कर देने वाली दुनिया में शोहरत पाने के लिए…और अपने दूर होते गये, गैर नज़दीक आते गये..जिन्हे सिर्फ़ विमी के सौन्दर्य का आक्रषण उनके नज़दीक लाने को विवश करता था…और विमी गफ़लत में आगे बढ़ती गयी अपना सब पीछे छोड़ते हुए… अन्तिम दिनों में सस्ती और घटिया शराब पीने के कारण वह बीमार हो रहने लगी, और फ़िर एक दिन इस खूबसूरत फ़िल्मी नायिका दुनिया को अलविदा कह गयी। कहते है, विमी की अन्तिम यात्रा में शरीक होने वाले चार-पांच लोग ही थे और उन्हे एक ठेले पर डालकर कब्रिस्तान तक ले जाया गया…अफ़सोस..विमी अपने पीछे बहुत से सवाल छोड़ गयी..कलकारों की दुनिया में स्वार्थ, सफ़लता और धन और महात्वाकांक्षाओं के मध्य जहां इन्सानी जिन्दगी कोई मायने नही रखती, उस गन्दगी की परिणिति थी विमी का जीवन..एक सुन्दर महिला…जिसका खुद पर गरूर और सामाजिक दायरों को तोड़ने का दुस्साहस, शोहरत का दीवानापन..जिसने वास्तविक जीवन और यथार्थ को बेदखल कर दिया था विमी के जीवन से..वह जान नही पाई कौन वास्तव में उसका था कौन नही..वह मंजिल की राह पर तो थी पर मंजिल कौन सी है, कैसी है, कहां है, शायद उन्हे नही पता था…और दूषित पुरूषत्व से लबा-लब भरी इस दुनिया में वह खिलौना बन गयी.विमी…. कहते है जमीन छोड़कर आसमान पाने वालों का यही हर्ष होत है, क्योंकि आसमान अनन्त है और अभी तक बहुत कुछ काल्पनिक…किन्तु धरती यथार्थ है.. इस बेहतरीन नायिका को मेरी श्रद्धांजली….अगर आप सब को इनके बारे में जादा मालूमात हो तो जरूर खबर करिएगा..
विमी ने इन बेहतरीन फ़िल्मों में काम किया…
हमराज़ (1967)
आबरू (1968)
पंतगा (1971)
वचन (1974)
यह गीत अवश्य सुने..विमी और शशि कपूर
कृष्ण कुमार मिश्र
9451925997

अगस्त 8, 2011 at 9:58 अपराह्न
अफ़सोस
अगस्त 10, 2011 at 4:14 अपराह्न
interestg.though i cant remember her in any of the above films
अगस्त 16, 2011 at 8:56 अपराह्न
nice
अगस्त 22, 2011 at 4:06 अपराह्न
though I was aware as how she died but thanks for adding this firmly in my knowledge
अक्टूबर 15, 2011 at 10:55 पूर्वाह्न
Really a sad story of an ambititious woman,
thanks for sharing,
http://vivj2000.blogspot.com -विवेक जैन