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मेरे मन बहुत दिनों से एक ख्वाइस थी कि अपने गांव के बारे में कुछ लिखू वहां कि संस्कृति परंपरायें लोक कहानियां, लोक गीत एवं वहां का इतिहास और ऐसा मैं सिर्फ़ अपने गांव के लिये नही सोचता मै उस देश के सारे गांवों के लिये जिस देश को गांवो के देश के नाम से जाना जाता है और यह इस लिये भी जरूरी है की वैदिक काल के बाद जो भी थोड़ा बहुत लिखा गया वह विश्वसनीयता की कसौटी पर खरा नही है पर इतिहास की तमाम झलकों का जखीरा जरूर है जिसमे से हम अपने जरूरत की चीजे प्राप्त कर सकते है हां चीनी यात्रियों अरबी यात्रियों व हिन्दूस्तान के शासकों के विद्वान दरबारियों ने अवश्य कुछ महत्व पूर्ण दस्तावेज तैयार किये ! बौद्ध साहित्य भी हमारे इतिहास व संस्कृति की तमाम बातें अपने आप में समाहित किये हुये है । किन्तु सबसे प्रभाव शाली और बेह्तरीन अन्वेषण ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश राज के साहसी अफ़सरों ने किया जिसमे हम अपने २०० वर्षों के भारत का सारा लेखा जोखा देख सकते है ।

यदि हम उत्तर भारत के गांव और उनके साहित्य, इतिहास आदि की बात करे तो मै पं० अमृत लाल नागर का नाम लिये बगैर नही रह सकता इसके अतरिक्त रामधारी सिंह दिनकर,  महापंड़ित राहुल सांकृतायन और पं० नेह्र्रू जिनकी किताबें हमारा मार्गदर्शन करती है पर बिडंबना ये है की नागर जी की तरह या फिर राहुल जी की तरह बहुत कम ही लोग हुये जिन्हों ने गांवों की छोटी बाते और पंरपरायें जो सदियों का इतिहास समेटें है अपने आप में उन्हे करीने से तलाशने की जरूरत है जिस तरह आल्हा खंड के बिखरे शब्दों को गांव गांव तलाश कर चार्ल्स इलियट ने इस काव्य को संकलित किया और दुनिया के सामने रखा बाद मे जार्ज अब्राहम ग्रियर्शन ने बाकायदे इसक अनुवाद कर और ज्यादा बल्लाड इसमेम जोड़े गांव – गांव घूम कर और दुनिया के सामने इसे “The nine lakhs or maro feud (1876)  के रूप मे सामने लाये। इसी तरह नागर जी ने गांव -गांव घूम कर १८५७ का इतिहास संकलित किया  ऐसे तमाम उदाहरण है जो प्रभावित करते है मुझे और इसी कारण मै निरंतर १५ वर्षों से विग्यान का विद्यार्थी होने के बावजूद अपने इतिहास और संस्कृति के बिखरे पन्नों को इन गांवों में तलाश रहा हूं जो अनमोल है आप भी आयिये हमारे साथ और सीखिये इन ग्रामीणों से जो कोइ विश्वविद्यालय आप को नही सिखा सकता।

कृष्ण कुमार मिश्र

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मैनहन-262727

खीरी

भारत वर्ष

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