हे ग्राम देवता ! नमस्कार !

Mahadeo

Mahadeo

सोने-चाँदी से नहीं किंतु

तुमने मिट्टी से दिया प्यार ।

हे ग्राम देवता ! नमस्कार !

१९४८ में लिखी गयी ये पंक्तिया हमारे गावॊं के किसानों पर है जो अन्नदाता है समाज का जिसे शत शत नमन!

किन्तु आज मै इतिहास के उस पन्ने पर दृष्टि डाल रहा हूं जो गौर तलब नही है हमारे मध्य मैं उस ग्राम देवता की बात करना चाहता हूं जो हमारे गावों में लोग अपने स्वास्थ्य, बीमारी, चोरी, डाकैती और महामारी से बचने के लिये ग्राम देवता को पूजते है खासकर महिलायें । यहां यह बताना जरूरी है कि महिलायें ही हमारे धर्म, पंरपरा, और रीति – रिवाज की वाहक एवं पोषक होती है एक पीढ़ी से दूसरी .तीसरी……….!  यही सत्य है !

आज भी ग्रामीण भारत के ग्रामों में स्त्रियां तमाम तरह के पारंपरिक धार्मिक रिति-रिवाजों का आयोजन करती है और इन आयोजनों के विषय में पुरुषों को कोइ खास मालूमात नही है या फ़िर वें यह जानने की कोशिश नही करते ।

कुछ बाते मै यहां बताऊगा जो एतिहासिक महत्व की है जिन्हे मेरी मां ने मुझे बताया, मेरे गांव मैनहन में जो देवता लोगों के द्वारा पूजित होते है वह इस प्रकार है भुइया माता, प्रचीन मंदिर, देवहरा, गोंसाई मंदिर, मेरे घर के सामने २०० वर्ष पुराना नीम जहां शिव भी स्थापित है, मुखिया बाबा के दुआरे का नीम, सत्तिहा खेत (सती पूजन) और एक और स्थान जो गांव के पश्चिम ऊसर भूमि में स्थित है की पूजा होती है मैने अपने जीवन में इन स्थलों पर पुरूषों को पूजा करते नही देखा कुछ वैवाहिक कार्यक्रमों  में शायद मुझे कुछ याद है कि कुछ पूरूष खेत में पूजा करने जाते थे ।

इन सभी स्थलों का अपना इतिहासिक महत्व है जो हज़ारों वर्षो की कहानी कहता है । आज पूरूषों की बात तो छोड़ दे महिलायें भी इन रीति-रिवाज़ों से अलाहिदा हो रही है । शायद कल हमारा ये इतिहास हमारी पीढ़ियों के लिये अनजाना हो ।

विदेशी परंपराओं का प्रभाव हम पर इतना भारी पड़ रह है कि हम अपनी परंपराओं से विमुख होते जा रहे है  ।

क्यों भाई अब आप ही बताइय़े कि एक फ़िल्म से आयातित हुआ वैलेनटाइन डे क्या हमारे गुरू पूर्णिमा पर या किसी अन्य दिवस पर भारी नही है ?

कृष्ण कुमार मिश्र

मैनहन

09451925997

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