बात पुरानी है लेकिन सुनाना जरूरी है

मैनहन में वृक्षारोपड़ करते हुए

आपरेशन ग्रीन कार्यक्रम मैनहन

३१ अगस्त,सन २००१, मैनहन (खीरी)

सरकार के एक कार्यक्रम आपरेशन ग्रीन के तहत मैने अपने गांव में तकरीबन १००० वृक्षॊं की रोपाई की, इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के वन-निगम के प्रबन्ध-निदेशक श्री आर०पी० सिंह ने अध्यक्षता की उनकी मौजूदगी नें खेरी के वन-विभाग को सक्रिय कर दिया था और सभी आला अफ़सरान मैनहन में पहले से उपस्थित थे, गांव के प्राथमिक विद्यालय में इस विशाल सभा का आयोजन हुआ और मितौली से मैनहन तक स्वागत द्वार बनाये गये, यह सारी व्यवस्था मेरे जिम्मे थी, कार्यक्रम की शुरूवात सरस्वती वंदना से हुई और फ़िर सभी आगुन्तको ने हमारे गांव के लोगों को संबोधित किया, वृक्षारोपण के मह्त्व बताये और वन-विभाग के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने पौधे रोपे, एक नीम का वृक्ष प्रबन्ध निदेशक ने रोपित किया और उस पेड़ की जगह एक पट्टिका लगवाई गई जिसे मै शहर से बनवाकर ले गया था उस पर महोदय का नाम लिखा हुआ था, स्कूल से पौधारोपड़ की शुरूवात हुई और फ़िर मेरी तमाम जगहों मे पौधे रोपे गये, जिनमें आम, नीम, सेमल आदि थे, सेमल के अधिक वृक्ष मुझे प्रदान किए गये थे चूकिं इनका व्यवसायिक महत्व है सो मैने तमाम वृक्ष वितिरित कर दिए।

मेरे गांव में मेरे द्वारा आयोजित यह प्रथम कार्यक्रम था, शुरूवात में तो लोग कौतूहल पूर्वक मेरी गतिविधि देख रहे थे कि आखिर रोज़-रोज़ वन-विभाग के अफ़सर क्यों आते है क्या तैयारिया हो रही है किन्तु उन्होने कुछ ज्यादा उत्सुकता नही दिखाई किन्तु जब आयोजन की सभी तैयारिया पूर्ण हो गयी तो सभी ने प्रेम से शिरकत की और मुझे उत्साहित भी किया,  ग्रामीणों का सहयोग भी मुझे मिला।  यहां यह बताना जरूरी है कि इस कार्यक्रम के तहत रोपे गये तकरीबन १००० पौधों में से मात्र ४०-५० पौधे ही आज विकसित हो पाये, इसे मै अपनी असफ़लता ही कहूंगा।

हां और वह पट्टिका जो प्रंबध-निदेशक जी के सम्मान में लाई गयी थी, मुझसे कहा गया कि इसे अभी उखाड लो पेड़ जब बड़ा हो जाये तो लगा देना किन्तु कुछ दिन बाद वह पेड़ ही वहा से उखड़ गया जिसे महोदय ने रोपा था तो पट्टिका कहां लगे और पट्टिका आज भी जंग लगी हुई मेरे गांव के घर मेम रखी है उसे जब देखता हूं तो………………

यहां श्रीमती इन्दिरा गांधी की एक बात याद आती है ।

“A nation’s strength ultimately consists in what it can do on its own, and not in what it can borrow from others.”

स्कूल में रोपे गये पौधे सुरक्षा के अभाव में ग्रामीणॊं व उनके मवेशियों द्वारा नष्ट कर दिये गये क्योकि उनकी उचित देखभाल नही हो सकी, जबकि सार्वजनिक स्थल पर लगे इन पौधों की सुरक्षा सबकी जिम्मेवारी थी।

खैर मेरी व्यक्तिगत भूमि पर जो पौधे लगाये गयें खेतों आदि में उन्हे पड़ोसी किसानों ने नीलगाय पर तोहमत लगाकर उखाड दिया गया ताकि पड़ॊसी के खेत में छाया न लगे और फ़सल प्रभावित न हो, लेकिन सेमल के पौधे इतना नही छितरते की वह सूरज की रोशनी को रोक सके। किन्तु मुझे इस बात की खुशी है कि जिन आस-पास के गांव वालों ने इन पेड़ों को मेरे खेतो से उखाड़ कर अपने घर-दुआर में रोपित किया और इनकी देखभाल की और वह पौधे अब वृक्ष में तब्दील हो गये है, यह जानकर प्रसन्नता होती है और मैं अपने आप को कुछ-कुछ सफ़ल पाता हूं। मुझे उनकी यह चोरी बड़ी सुन्दर लगी।

इस बेहतरीन कार्य में मेरा सहयोग देने वालों में मेरे गांव के लोगों में बड़े भाई श्री सुधाकर शुक्ल जी, दाऊ श्री रामावध शुक्ल जी, दाऊश्री परमेश्वरदीन जी, दाऊ श्री(स्व०) बेंचेलाल पाण्डेय जी (पूर्व प्रधान), दाऊ श्री शिवदयाल मिश्र जी, बाबा (स्व०)मुन्ना लाल शुक्ल जी, इसके अलावा मेरे कार्यकर्ता जिन्होने शारीरिक श्रम का योगदान दिया, और मेरे सभी मित्र गण जिनकी भागीदारी महत्वपूर्ण रही। मैनहन के अतिरिक्त तमाम गांवों के लोगो ने जो शिरकत की उनमें चाचा श्री बलबीर सिंह(पूर्व ब्लाक प्रमुख), गुरू जी श्री वी०पी० सिंह जी, कविवर कंटक जी, वनाधिकारी नकवी जी, उदयभान सिंह जी, मित्र श्री अमित श्रीवास्तव जी, अमित गुप्ता जी, विद्यालय के अद्यायपक गण आदि का मै कृतज्ञ हूं।

इस कार्यक्रम का मुझे जो सबसे ज्यादा फ़ायदा मिला वह यह कि सभी आदरणीय ग्रामजनों की उपस्थित और उनकी शक्लॊं का कैमरे में कैद हो जाना, इस आनी-जानी दुनिया में वो चेहरे मेरे पास जीवित रहेंगे उन तस्वीरों के रूप में।

अब मैने वृहद स्तर पर यह कार्य न करके प्रत्येक वर्ष कुछ प्रजातियों का रोपण करता हूं, और उनमें से अधिकतर पौधे लगातार वृद्धि कर रहे है, मेरी पहली पसन्द है बरगद, पीपल, पाकड़, उसके बाद कुछ और………..और यही वृक्ष मेरी मां को भी पसन्द है।

कृष्ण कुमार मिश्र

मैनहन-२६२७२७

भारतवर्ष

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