१६ दिसम्बर २००९, खीरी (उत्तर प्रदेश)जनपद का यह वीभत्स हादसा, राजा लोने सिंह मार्ग पर घटित हुआ।  जो तकरीबन ५५ किलोमीटर लम्बा है, लखीमपुर से मैंगलगंज तक। जिसमें पांच यात्रियों की मृत्यु हो गई। जबकि लगभग सभी सवार घायल हुए है जो जिला अस्पताल में भर्ती है, मितौली कस्बे के आगे कठना नदी पर स्थित पुल से पहले ये हादसा हुआ जहां  साइकल सवार को कुचल कर ड्राइबर चलती बस को छोड़ कर कूद गया और बस कठना नदी की कटरी मे पलटती हुई नीचे जा गिरी। ये बात औरंगाबाद निवासी दिलदार और मैनहन निवासी नेतराम मिश्र  ने बताई ये दोनों व्यक्ति  जिला अस्पताल में भर्ती है।

मृतकों में तीन व्यक्ति मितौली थाना क्षेत्र के है, जिसमें अरविन्द मिश्र ग्राम ओदारा, अब्दुल मज़ीद व अर्विन्द सिंह मितौली कस्बे के निवासी थे। जोगेश्वर नाम का व्यक्ति सीतापुर का बताया जा रहा है। जबकि एक व्यक्ति की शिनाख्त अभी नही हो पायी है।

घायलों व स्थानीय प्रत्यक्षदर्शीयों के मुताबिक मृतकों की सख्या अधिक बताई जा रही है।
दोषी परिस्थित है जिसे हमने बनाया है बदहाल सड़के, खटारा बसे, ट्रैफ़िक नियमों का उल्लघन! और इस सड़क के फ़ुटपाथ का गायब हो जाना। लखीमपुर से मैगलगंज(माइकल गंज)  तक के सकरे मार्ग पर यातायात का दबाव, जहां ट्रक, बैलगाड़ी, बस और ट्रैक्टरों की बढ़ती तादाद के बावजूद शासन व जनप्रतिनिधियों ने इस तरफ़ कोई ध्यान नही दिया। कभी सड़कों पर मौजूद गढ़्ढ़ों पर  फ़टी बुशर्ट पर प्योंदें लगाने जैसा फ़र्ज़ी काम हुआ तो कभी सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए नाप-जोख। जानकार बताते हैं कि इन गढ़्ढों की मरम्मत में भी पेंच होता है, जहां सड़क ज्यादा खराब होती है उसे नही ठीक किया जाता है, और जहां स्थित थोड़ी ठीक होती है उसमें पच्चीकारी कर दी जाती है ताकि निरीक्षण के दौरान वे उन अधिक टूटी सड़क को दिखा कर बता सके कि ये रोड इतनी खराब थी जिसे उन्होंने ठीक किया हैं। इसके अलावा भारत का नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी को इन अफ़सरों और ठेकेदारों पर डालकर आराम फ़रमाता है, हम किसी भी सरकारी काम में हस्तक्षेप करने से गुरेज करते है लेकिन क्यों?

उत्तर प्रदेश की बढ़ती जनसख्या और यातायात के संसाधन, जिनके लिए अब सड़के और शहर सकरे और छोटे होते जा रहे है किन्तु हमारे मुल्क का अनियोजित विकास समस्याओं को और बढ़ाता जा रहा बज़ाए उन्हे नियोजित करने के।

यहां मैं ईश्वरवादी हो गया!  क्योंकि मैं जानता हूं कि ये मरने वाले आम इन्सान थे, और घटना भी आम, हमारे मुल्क में सड़क दुर्घटना को सामान्य घटना ही माना जाता है, और इनमे मरने वालों के प्रति न तो मन्दिर-मस्ज़िदों मे प्रार्थना होती है और न ही राष्ट्रों के राष्ट्रा्ध्यक्ष शोक सभाओं का आयोजन करते है, क्योंकि ये मौते न तो  २६/११ की तरह किसी आंतकवादी घटना का परिणाम होती है, और न ही साम्प्रदायिक दंगों में। यहां न तो किसी का बल्ला चल रहा होता है, और न ही किसी टी०वी० शो में कम्पटीशन, न ही  कोई नेता या फ़िल्मी स्टार भी पांच सितारा अस्पताल में  होता है ! इनके लिए दुआए सिर्फ़ इनके घर वाले करेंगे न कि………………..!!!

इस लिए मेरे लिए ये जरूरी हो जाता है कि मै ईश्वरवादी हो जाऊ, अपने उन लोगों के लिए, जिनके रंगों में उसी धरती का अन्न, व पानी खून बन कर दौड़ रहा है जो मेरी रंगों में।

मैं परमात्मा से प्रार्थना करता हूं कि उन्हे शान्ति प्रदत्त करे, वे मनुष्य जिन्होंने अपने-अपने परमात्मा को भी जुदा-जुदा कर लिया और दोज़ख व जन्नत को भी, उन सभी के लिए,  उन सभी के ईशों से, मैं कुछ पल हिन्दू तो कुछ पल मुसलमान बनकर, ताकि वह उन सब पर रहम करे, और अपनी शरण में ले। वह सुन्दर रचना करने वाला, अपनी इन रचनाओं को जो घायल और तकलीफ़ में है, उन्हे स्वस्थ्य करे।

मेरी ये प्रार्थना वह जरूर सुनेगा, क्योंकि मैं………………..धर्म जीना सिखाता है और ईश्वर जीवन के रास्ते पर चलने का साहस देता है। एक पिता की तरह।

कृष्ण कुमार मिश्र

मैनहन-२६२७२७

भारतवर्ष

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