किसी रोज़ एक और भयानक हादसे पर चेतेगा प्रशासन-

मौत का सबब बन सकती है स्टेट हाइवे नम्बर २१ और मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड नम्बर ८६ सी की क्रासिंग।

एक सड़क जिसके नाम से गाफ़िल है खीरी के लोग- SH-21

लखीमपुर से मैंगलगंज तक जाने वाली सड़क ज्यों ही शहर से बाहर गुजरती है,  तो उसे एक लक्ष्मण रेखा पार करनी पड़ती है। जहां कुछ वर्ष पूर्व एक एडवोकेट की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। ये लक्ष्मण रेखा है SH-21, जिसे हमारे लोग आसाम रोड, और एल आर पी के नाम से जानते हैं जो कि नार्थ लखीमपुर में स्थित है, पूर्वोत्तर राज्यों में यह सड़क चाइना वार के उपरान्त बनवाई गयी थी। शायद कभी किसी राह चलते मुसाफ़िर ने लखीमपुर नाम सुनते ही इसे आसाम वाले लखीमपुर का स्मरण करते हुए आसम रोड कह दिया, या फ़िर किसी ट्रक वाले ने, जो आज सरकारी कागजो से लेकर आम जनमानस में परचलित शब्द हो गया, अज्ञानता बस बोला गया झूठ दोहराते-दोहराते कथित सच में तब्दील हो गया।

जबकि कथित आसाम रोड (SH-21)  NH-91 से निकलकर गंगा पार करती हुई, बिलग्राम, हरदोई, सीतापुर होते हुए लखीमपुर आती है, यहां से यह गोला होते हुए पीलीभीत में SH-26( SH-26, NH-74 में मिल जाती है) में मिलकर समाप्त हो जाती है।

ये SH-21 को जब शहर के बाहर बाईपास (SH-21)  को    MDR-86C क्रास करती हुई,  मोहम्मदी तक जाती है। यही सड़क जब मितौली कस्बे के आगे MDR-14C में मिलती है जो मैंगलगंज को जोड़ती है|

SH-21 को MDR-86C जब शहर के बाहर क्रास करती है तो वह क्रास इतना खतरनाक हो जाता है कि किसी भी वक्त कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। वजह है यहां पर बढ़ता रिहाइसी इलाका और इस क्रास यानी चौराहे पर कोई रम्बल स्ट्रिप भी नही है और डिवाइडर भी नही, चूकिं स्टेट हाइवे को एक पतली सड़क पार करती,  आबादी से निकल कर इस लिए इन सड़कों पर गुजरने वाले तेज़ गति के वाहन रफ़्तार धीमी करना मुनासिब नही समझते, यहां किसी तरह की चेतावनी वाला बोर्ड है और न ही लाइट जिससे गुजरने वाले वाहन चालक को यह मालूम हो सके कि वह एक चौराहे को पार कर रहा है।

इसी चौराहे से थोड़ा हटकर राजा  बिजली पासी का स्मारक, यदि यह स्मारक इस चौराहे पर स्थित होता तो वाहनों की बे-रोक-टोक आवाजाही पर रुकावट हो सकती थी।

ऐसे में एक बेहतर विकल्प ये हो सकता है कि व्यवस्था को इस चौराहे पर १८५७ के क्रान्तिकारी राजा लोने सिंह का स्मारक बनवा दे,  राजा लोने सिंह के नाम से इस पूरे जनपद में कोई स्मारक नही है।

एक और सड़क जिसके नाम से गाफ़िल है खीरी के लोग।- MDR-86C यानी राजा लोने सिंह रोड

मेरी इस राय को एक और तथ्य मजबूती देता है, कि जो सड़क SH-21 को पार करती हुई चौराहे को अस्तित्व में लाती है उस सड़क का नाम “राजा लोने सिंह मार्ग” (MDR-86c) है, कभी लखीमपुर रेलवे क्रासिंग पर जहां से इस सड़क का उदगम है, वहां एक शिलालेख हुआ करता था जिस पर राजा लोने सिंह रोड लिखा था। अब न तो वहां कोई शिला बची और न ही लेख। लोग भी भूलते गये इस सड़क के नाम को साथ ही उस क्रान्तिवीर के महान कृत्यों को। वैसे अक्सर इस पुरानी शिला पर विज्ञापन ही चिपके रहते थे सो लेख से शहरवासी महरूम ही रहे, लिहाज़ा इस सड़क का नाम चलताऊ भाषा के अनुसार प्रचलन में आ गया लखीमपुर-मैंगलगंज रोड, या बेहजम रोड (लखीमपुर व मैंगलगंज के मध्य का गांव) इन चलताऊ शब्दों की उत्पत्ति मोटर क्लीनर और कंडक्टरों के मुख से हुई…………मितौली,,,,,,मैंगलगंज….बेहजम……..सवारी……..आदि

चौराहे पर इस महान एतिहासिक नायक की प्रतिमा लग जाने से दो लाभ होगे! एक तो हमारी पीढ़ी जो भूलती जा रही है अपने इस सुन्दर अतीत को, उसे मौका मिलेंगा कुछ जानने का, दूसरा इस बहाने इस सड़क से गुजरने वाले लोगों को अपनी व दूसरों की मौत से दो चार नही होना पड़ेगा, वो भी कुछ ठहरेंगे और शीष भले न नवाये इस स्मारक के समक्ष, किन्तु जिज्ञासा बस इस महान नाम से  परिचित तो ही जायेंगे।

कृष्ण कुमार मिश्र

मैनहन-२६२७२७

भारत

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